Asaram’s 10,000 crore empire

Dear Aroon Purie,

I’m writing here in response to article published in INDIA TODAY August 17, 2015 about Asharam Bapu. The article is an irresponsible one which is bashing one of the oldest charity organisation in country which has always worked for poor and needy. Instead of bringing truth to people and giving an objective story, author here has painted a picture of lies.

India today claims that : Rishi Prasad and Lok Kalyan Setu makes an annual profit of 10 Crores.
Let me enlighten you that your investigative journalist was surely smoking pot while writing it because numbers don’t add up here. Rishi Prasad and Lok Kalyan setu are monthly publication which sells at cost of mere Rs.2.50. Ashram is selling these magazine at zero profit to make sure quality literature reaches to middle class and lower class followers of Bapu. If a Rs 2.50 magazine is making 10 crore profit than I wonder how much your weekly magazine India today is making? Billions probably!

Article goes on to claim that Asharam Bapu’s CD sales were 1 crore every 2 days, I promise you Karan Johan would have signed him long ago if that was the case.
Your article profess that ashram receives 150-200 Crores in donation each year. Asharam Bapu is known as masses Saint. Majority of his follower belongs to lower class or poor class. Asharam Bapu’s satsangs and shivir have always been free unlike Art of living or Ramdev’s yoga shivir who charge their followers. Also if you would care to listen even one cd of Bapu he always tells his followers that he doesn’t want monetary funds from followers only chanting God name will be his guru dakshina.

India today further maligns Ashrams good work by saying that money was collected for bhandara done for poor people, which is a blatant lie as Ashram has never collected money or appealed for any donations. Each line in this article is a lie and I can go on and on about what a poor piece of fiction it is.

India Today group which also owns Aaj Tak, mMusic Today, India biz, Business Today and several joint ventures with foreign brands is a wealthy affluent media group. However, as they say Money can’t buy you class. India today has stooped to cheap tactics to please their sponsors (Vatican missionaries here). It is not the first time India Today group has opened front against Asharam Bapu. In September 2010 they broadcasted a sting operation where they said Asharam Bapu has agreed to keep a woman with criminal background in his ashram. When I investigated it further it was revealed that interview was a highly edited version where channel themselves took a woman to Bapu and tried to talk him into giving refuge to her. I challenged the channel and asked them to show unedited version of interview to which they shamelessly replied that I should take them to court of law.

Vatican Missionaries whose mission is a Christian India found Asharam Bapu as their biggest nemesis. To remove him out of their way they have used unfaithful treacherous Indian media who would stoop to any low for money. India Today group which is one of the wealthiest in country has shown that money is more important than country or religion. They have sold their soul to these western merchants of religion. In history I read about Jaichand, Aroon Purie you are modern day Jaichand who has everything but for insatiable thirst of money you have sold soul to the devil.

 

 

Also read Financial Status Of Asharam Bapu 

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6 thoughts on “Asaram’s 10,000 crore empire

  1. Dear Poorie,

    Please check the details before printing or lashing out to common people.

    We have been saying most of the people saying paper me aaya hai.. paper wale sach bolte hai.. But, Please i would like to ask you as your brother/ friend that is it true that all paper is writing true.. Is the written published by you ever checked or notified by you?

    Just to write small, please do not play any negative options- games with indian community because today you are playing negative factor for indian community. Just like dhobi for sita maa.

    Please do check and reply immediately.

  2. ‘इंडिया टूडे’ पत्रिका के सम्पादक अरुण पुरी के नाम लंदन की
    एक महिला श्रीमति सुनन्दा तंवर का एक खुला पत्र
    प्रिय अरुण पूरी,
    मैं ‘इंडिया टूडे’ पत्रिका के 17 अगस्त 2015 के अंक में आशाराम जी बापू के विषय में प्रकाशित एक लेख को पढ़ कर तुम्हें यह पत्र लिख रही हूँ|- यह लेख अत्यंत गरीब व आदिवासियों के हित में काम कर रही उनकी संस्था व आश्रम को बदनाम करने के उद्देश्य से लिखा गया झूठ का एक पुलिन्दा मात्र है|
    आपके खोजी पत्रकार (?) ने दावा किया है कि आश्रम की दो पत्रिकायें क्रमशः ‘ऋषि प्रसाद’ व ‘लोक कल्याण सेतु’ प्रतिवर्ष मोटा मुनाफा कमा रही हैं| मैं आपको बताना चाहती हूँ कि संत आशाराम जी आश्रम द्वारा प्रकाशित यह दोनों मासिक व पाक्षिक पत्रिकायें ‘नो प्रोफिट नो लॉस’ के आधार पर क्रमशः मात्र 6 रुपये तथा 2.50 रुपये के मूल्य पर समाज में भारतीय व वैदिक संस्कृति के प्रचार व प्रसार हेतु प्रकाशित की जाती हैं| इन पत्रिकाओं में कोई बाहरी विज्ञापन भी नहीं होते हैं| यदि इस पर भी आपका खोजी पत्रकार इन पत्रिकाओं से प्रतिवर्ष 10 करोड़ का मुनाफा आंक रहा है, तो कृप्या आप भी खुलासा करें कि आप अपनी साप्ताहिक पत्रिका ‘इंडिया-टूडे’ को 40 रुपये में बेच कर कितने अरब रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं?
    आपकी पत्रिका के लेख में आगे यह भी कहा गया कि आशाराम बापू की सीडी बिक्री लगभग 50 लाख प्रतिदिन की है, मैं आपसे कहना चाहती हूँ यदि वास्तव में ऐसा होता तो करण जौहर तो काफी पहले ही उन्हें साईन कर चुका होता|
    आपके सीनियर व खोजी(?) पत्रकार ने आगे लिखा है कि संत आशाराम बापू के आश्रम को प्रतिवर्ष 150 से 200 करोड़ रुपये चन्दे के रूप में प्राप्त होते हैं|
    इस पर मुझे कहना है कि संत आशाराम बापू आम आदमी के संत हैं तथा वह ‘श्री श्री रविशंकर जी’ अथवा ‘बाबा रामदेव’ की तरह किसी भी सत्संग अथवा शिविर के लिए कोई फीस भी चार्ज नहीं करते हैं| और यदि कभी आपको पूज्य बापू जी का सत्संग अथवा उनकी कोई सी.डी. सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो जाये तो आपको जानकारी मिलेगी कि बापू जी ना तो दीक्षा देते हुए कोई नकद दक्षिणा अथवा कोई वस्तु स्वीकार करते हैं और ना ही गुरु पूर्णिमा अथवा अन्य किसी पर्व पर भी|
    आश्चर्य का विषय है कि आपका खोजी व सीनियर पत्रकार तो आश्रम द्वारा आयोजित भंडारों एवं अन्य सद्प्रवृतियों द्वारा भी धन एकत्रित करने का आरोप लगा रहा है| मैं आपको बता दूँ कि आश्रम द्वारा संचालित भण्डारे केवल गरीबों, बनवासियों तथा आदिवासियों में विराजमान ‘दरिद्र नारायण’ की सेवा के लिए आयोजित किये जाते हैं ना की चंदा एकत्र करने के लिये|
    कितने आश्चर्य की बात है कि आपका बिजनेस ग्रुप-आजतक समाचार चैनल, म्यूजिक टूडे चैनल, बिजनेस टूडे चैनल अथवा अन्य कई विदेशी ब्रांड्स के साथ बिजनेस कर आपके लिए धनवर्षा कर रहा है| किन्तु फिर भी जैसी कि एक कहावत है कि पैसे से कभी मनुष्यता नहीं खरीदी जा सकती-आपका केस भी मुझे वही लगता है| आपने तो मनुष्यता के अत्यंत नीचे स्तर पर उतरकर वेटिकन व ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रयोजित यह लेख केवल उनकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए छापा गया लगता है| और ऐसा पहली बार भी नहीं है, जब आप देश के एक महान हिंदू संत आशाराम जी बापू के विरुद्ध पहली बार ऐसा काम कर रहे हैं|
    सितम्बर 2010 में भी आपके समाचार चैनल ‘आजतक’ ने एक स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया था कि संत आशाराम जी बापू अपने आश्रम में एक अपराधी महिला को रखने के लिए राजी हो गये हैं| मैंने जब इस विषय में कुछ खोज की तो पता चला कि आपके चैनल के ही कुछ व्यक्ति एक महिला को लेकर बापू जी के पास हरिद्वार पहुँचे थे तथा कहा था कि इस महिला की जान को खतरा है, अत: कृपया एक दो दिन इसको अपने आश्रम में शरण दे दें|
    यह पूरा षड्यंत्र आपके चैनल की टीम ने बनाया था तथा जो स्टिंग वो दिखा रहे थे, वह भी काफी जोड़-तोड़ करके बनाया गया स्टिंग था| मैंने जब आपके चैनल के अधिकारियों को बिना एडिट किया हुआ पूरा स्टिंग दिखाने के लिए फोन किया तो उन्होंने अत्यंत निर्लज्जता से उत्तर दिया था, कि-आप अदालत में जा सकती हैं|
    वेटिकन की ईसाई मिशनरियों का उद्देश्य, भारत का ‘ईसाईकरण’ है| इसीलिए भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने वाले संत आशाराम जी बापू तो उनके जन्मजात दुश्मन बने हुए हैं, अत: उन्हें हटाने के लिए ही वो भारत के ‘देशद्रोही व निर्लज्ज’ मीडिया को अपनी अकूत दौलत के बल पर आज ‘जयचंद’ बना रहे हैं|
    ‘इंडिया टूडे’ ग्रुप एक अत्यंत धनी व पैसे वाला बिजनेस ग्रुप है किन्तु अरुण पुरी जी जब भी भारतीय संस्कृति व हिंदू धर्म का इतिहास लिखा जाएगा तो आपका नाम भी आज के ऐसे ‘जयचंदों’ की सूची में शामिल होगा, जिन्होंने पैसे की लिप्सा के लिए अपनी आत्मा व धर्म दोनों को ही धर्म के सौदागरों के हाथ नीलाम कर दिया था|
    धन्यवाद सहित,
    दिनांक 19-08-2015 भवदीय
    सुनंदा तंवर
    16, पालम कोर्ट, लन्दन, यू.के.

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